Thursday, 19 July 2018

रोने का दिल करता है


रोने का दिल करता है रोयूं मैं किस काँधे पर एक था कांधा रोने को जिसे छोड़ आया मैं शमशान काँधे पर आम का लिफाफा खोलते ही आम मैं खा जाता था दिल करता है अब पूछ ही लूँ पापा, आम का पैसा कहा से आता था जलती सुलगती गर्मी में कूलर के आगे सुलाते थे मूंछ कट जाने का डर था तुम्हे फिर भी दाढ़ी मुझे बनाने देते थे गरीबी का काँटा चुबता था मुझे और मेरे भाई को खुशनुमा तरबियत से हमे फूल बना डाला सम्मान है तुझे और मेरी आई को रोने का तो दिल करता है पर कांधा नहीं है रोने को ज़मीन का टुकड़ा तो में खरीद ही लूँ पर तेरे जैसा बीज नहीं है बोने को

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