एकांत - गोपाल



एकांत में हो,

तो बात हो सकती है स्वयं से,

विवाद से संवाद तक की यात्रा सरल करता है एकांत।


प्रेम का एकांत में चिंतन करना

किस्से नहीं,

कहानियाँ लिखता है।

वे कहानियाँ,

जिनकी मृत्यु,

धरती के जीवन जितनी लंबी होती है।


एकांत में रहने वाले व्यक्ति,

लिख लेते हैं साहित्य,

सुन पाते हैं पत्तियों का गीत,

बोल लेते हैं कविताएँ,

देख सकते हैं विवादित चेहरों के भीतर,

वे दर्शन कर पाते हैं ग्रंथों का,

और बिन घोषणा हो सकते है बुद्ध।


एकांत कोई कला नहीं है,

यह कलाकार का,

कला से पहला परिचय है।


एकांत में रहना,

जीवन की मृत्यु से मित्रता करवाना है।


मनुष्य ने जितने भी,

आविष्कार आज तक किए हैं,

वे शोर में नहीं,

एकांत की गोद में ही जन्मे हैं।


पर्वत, झरने, जंगल, सागर,

हमारे सहायक हैं,

एकांत में रहने के लिए,

इसीलिए,

शहरों से थककर,

लोग उनके पास लौट जाते हैं।


एकांत हमें ले जाता है,

गर्भ की अवस्था में,

जहाँ शब्द नहीं थे,

पर स्नेह था,

प्रेम था,

और मौन था।


एकांत में होना,

प्रेमी होने जैसा है।

जहाँ जीवन,

कुछ देर के लिए,

गतिहीन,

विशेष,

और सुंदर हो जाता है।

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