एक प्यार की कश्ती


एक कश्ती थी समुन्दर में गुमी हुई,

दो जिंदगियां थी उसमे सजी हुई,

एक में था, एक वो थी,

ऊपर खुला आसमान था,

नीचे गहरे पानी की आहट थी,

कुछ बीती यादों को तुमने याद किया,

कुछ गुज़रे लम्हों का मैंने जिक्र किया,

डर भी था मौत से,

खुशी भी थी तम्हारे साथ से,

उन आखरी पलों में तुम्हारी खूबसूरती में कही खो जाना चाहते थे,

तुम भी हमारे कंधे पर सर रखके सोना चाहती थी,

वो पल बड़ा अजीब था,

एक तरफ मौत थी,

और दूसरी तरफ दोनों एक दूसरे कि चाहत में डूब जाना चाहते थे,

एक लहर आई हमारी कश्ती साथ ले गयी,

और एक पैगाम दे गयी,

"प्यार करने वाले कभी जिया नहीं करते,
इज़हार करने वाले मरा नहीं करते, 
शारीर की शाखाएं सुख जाती है,
जिंदगियों के पत्ते गिर जाते है,
पर चाहत के पेड़ कभी गिरा नहीं करते!"

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