Posts

Showing posts from February, 2026

मेरी आख़िरी कविता

Image
एह मेरी कविता, मैं अब तुझसे विदा लेता हूँ। तेरे घर में कितने कामयाब कवि ठहरे होंगे, कितने सफ़र पर चलते हुए यहाँ ठहरे होंगे। पर मेरा ठहरना तेरे आँगन में, बस इतना ही था। मैं अगर कुछ देर और बैठा, तो यह अपमान होगा उनके लेखन का, जिनका यहाँ आना अभी शेष था। मैं अब कवि नहीं रहा। मुझे अब यह कुदरत आकर्षण नहीं देती। रात मित्र नहीं है, वृक्ष संगीत नहीं देते। जिस देह पर कितने गीत अभी लिखे जाने थे, वह प्रेम की सियाही अब मेरी कलम में नहीं रही। मेरे दृश्य अब, प्रेम की कल्पना नहीं करते। मुझे चेहरे एक-से दिखने लगे हैं, और मेरा दर्पण, मुझे दैनिक सलाह देता है, कि तुम अब कवि नहीं हो। इसलिए मैंने हफ़्तों से, दर्पण नहीं देखा। मैं कवि जन्मा हूँ, तो कवि ही मरूँगा। पर मेरी साधना मुझे यह विश्वास दिला रही है, कवि, तुम्हें जीवन ने नहीं, प्रेम ने बनाया था। अब कवि होना, उसका अभिनय करने जैसा है, जैसे बड़े शहरों में लोग मित्रता का अभिनय करते हैं। एह कविता, मुझे एक नए पथ पर निकलना है। मुझे यह भूलना है, कि मैं एक कवि था। उस पथ में अनुराग, ममता, आसक्ति, अवैर, करुणा, सब होगा, पर प्रेम नहीं होगा। कोई राह पूछेगा प्रेम की, त...